ब्लाइंड वर्ल्ड कप

कभी कभी कुछ घट रहा होता है और हम को नहीं दिखता ।हम जैसे दिनांध हो जाते है।

एक ऐसी अदभुत घटना जो हौले हौले अपना चाप और छाप विश्व जगत पर छोड़ रही है ।ब्लाइंड क्रिकेट वर्ल्ड कप ऐसा खेल जो कविता लिखने जैसा हो, जिसमें संवेदना हो,आभास हो,धैर्य हो और जो किसी अल्प को विकल्प दे रहा हो मुस्कुराने की वजह दे रहा हो।

जिस खेल को अंधे खेल रहे हो और आँख वालों ने आँखे बंद कर ली हो।ये है आज का ब्लाइंड क्रिकेट वर्ल्ड कप।

इस खेल का स्वरूप,नियमावली और तरीक़ा थोड़ा सामान्य प्रख्यात क्रिकेट से अलग हो सकता है पर जज़्बा , हुनर , रोमांच और खेल प्रेम एक जैसा ही है।

संवेदना लहर , मुस्कुराहट ,आँसू और ग़ुस्सा दोनो में बराबर मात्रा में है बस ये अंतर है कि एक में ये सारे भाव कुछ समुचित लोगों में सिमटे हुए है और दूसरे में ये सारे भाव एक जन साधारण तक विस्तारित है।

पहले वर्ल्ड कप जो की १९९८ में साउथ अफ़्रीका और पाकिस्तान के बीच नई दिल्ली में खेला गया और साउथ अफ़्रीका की जीत हुई ।

कहा जाता है उस वक़्त भारत सरकार ने आर्थिक सहायता का वादा देकर भी अपने हाथ एन मौक़ा पर खींच लिया तब भी खेल प्रेम और एकजुटता ने अपनी गति नहीं छोड़ी।

वर्ल्ड कप हुआ और फिर होता गया ।WBCC की स्थापना १९९६ में हुई जिसमें दस देशों ने रुचि दिखाई और वो देश आज भी स्थायी सदस्य है ।दस सदस्य जिन्होंने मिलकर इस खेल को सम्भाला है वो है आस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, इंग्लैंड, नेपाल, न्यूज़ीलैंड, साउथअफ़्रीका,वेस्ट इंडीज, श्री लंका ,पाकिस्तान और हमारा प्यारा भारत है ।

पहली बार वर्ल्ड कप १९९८ में खेला गया ।तब से पाकिस्तान और भारत के बीच रस्साकशी इस खेल में चल रहा है ।ऐसे अगर भारत – पाकिस्तान में गिल्ली डंडा का मैच भी हो रहा हो तो पूरा संसार TV पर चिपक जाता है कितनी ही जगह पूजा हवन की तैयारियाँ होने लगती है।हारने और जितने में TV सेट फोड़ दिए जाते है।इस खेल ने भारत और पाकिस्तान दोनो की ये विधा और रस्मों को भी तोड़ दिया कही कोई सनसनाहट नहीं कहीं कोई हंगामा नहीं सब कुछ ऐसे घटता रहा जैसे कुछ घटा ही नहीं।

१९९८ में पाकिस्तान साउथ अफ़्रीका से हारा

२००२ में चेन्नई में पाकिस्तान ने साउथ अफ़्रीका को पटका

२००६ में इस्लामाबाद में पाकिस्तान ने भारत को हरा कर अपनी वर्चस्वता फिर जता दी।

यहाँ से भारत ने ऐसी सीख ली और अपनी योग्यता साबित करने की ऐसी क़सम खायी जो आज भी अपराजित देश बन अपनी ध्वजा फहरा रहा है।

२०१५ और २०१८ दोनो बार भारत ने पाकिस्तान को धूल चटायी और विजय पताखा लहराया।

इतना ही नहीं २०१२ और २०१७ के टी २० वर्ल्ड कप मैच में भी भारत ने पाकिस्तान को ही हराया ।

आश्चर्य जिस देश में पाकिस्तान के विरुद्ध एक पटाखा फोड़ने में भी गर्व महसूस किया जाता हो,सीमा पर एक रात पार टहल आने में सारी कायनात सारे राजनीतिक पार्टियों में भूचाल आ जाता है।प्रधानमंत्री भी आगे आकर वीरगाथा गाते है इतने बड़े और सार्थक विजय पर कोई आवाज़ भी नहीं उठा रहा हर तरफ़ शांति है।

हमारी प्रिय सोशल मीडिया भी जागृत नहीं बल्कि सुषुप्त हो रही है।

जिनका ख़ून एक पदमावत फ़िल्म के ग़लत या सही बनने पर खौलता है उनका ख़ून इस गर्व को जश्न बनाने और मनाने के लिए क्यों नहीं खौलता।

पर ज़रूरत है आज आवाज़ उठाने की,गर्व से छाती फुलाने की और ख़ुशी से चिल्लाने कि भारत की जय हो ब्लाइंड क्रिकेट टीम की जय हो।उस सोंच की जय हो जिसने इस खेल को जन्म दिया और दिव्यांगों को गौरान्वित होने का मौक़ा दिया।

जय हिन्द

यतीश कुमार २३//२०१८

 

 

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