इंसान की पहचान या हमारे मन की छवि?

इंसान की पहचान या हमारे मन की छवि?

Hello दोस्तो,

हम सभी अपनी जिंदगी में ना जाने कितने लोगों से मिलते है।और उनमें से बहुत दोस्त भी बनते है और कुछ बहुत अच्छे दोस्त बन जाते है।लेकिन ऐसा भी होता है कि जो कल तक बहुत करीब थे आज उनसे बात तक नही होती,इसकी भी वजह होती है,एक वजह तो यह हो सकती है कि आप दोस्त तो है लेकिन दूर है समय की कमी के कारण।लेकिन एक और वजह भी है,कि कल तक जिसे आप अपना कहते थे,आज उसी से दुश्मनी हो गई।और इस वजह में गौर करने वाली बात ये है कि लोगो की दुश्मनी उन्ही से होती है जो कभी उनके करीब थे,है ना ये कमाल की बात।आपने कभी नही सुना होगा कि किसी अनजान इंसान से किसी की दुश्मनी हुई हो।

दोस्ती लोग तब करते है,जब उन्हें किसी इंसान में अच्छाई दिखती है,और दुश्मनी या यूं कहें कि नाराज़गी तब होती है जब उसी इंसान में बुराई नज़र आती है।लेकिन देखा जाए तो जिस इंसान की अच्छाई देख कर हमने उससे दोस्ती की,ऐसा क्या हुआ जिसके कारण अब उसकी बुराई दिखने लगी,और दुश्मनी हो गयी।

चलिए बात ऐसे शुरू करते है कि एक इंसान से आप मिले उसने आपसे अच्छे से बात की।अपनी अच्छाई सच्चाई दिखाई।आपको लगा कि इस तरह के अच्छे इंसान दुनियां में नही मिलते आपकी दोस्ती उनसे हो गयी।

कुछ साल बाद किसी ने आकर आपको उसी इंसान के बारे में बहुत सी बुरी बातें बता दी।और आपने उसी इंसान से दोस्ती खत्म कर दी।और उससे अलग हो गए।फिर 2 साल बाद आप उसे किसी अनजान शहर में देखते है कि वही इंसान लोगो की मदद कर रहा है,जिस जगह वो काम कर रहा है सभी उसकी अच्छाई की तारीफ कर रहे है।तब आपको अपने फैसले पर शक होगा।कि क्या जिस इंसान ने इसके बारे में बुराई कि उसने झूठ बोला?

तो सच क्या है?जो उसने बुराई में बोला ? या जो अब आंखों से देखा और इतने सारे लोगो ने कहा?

सच तो सबके लिए अलग अलग होता है,एक इंसान किसी की नज़रों में भगवान होता है और वही इंसान किसी और की नज़रों में शैतान होता है।लेकिन सच मे वो इंसान कैसा है ये कोई बहुत ही कम लोग जान पाते है।किसी की कही बातें,किसी के द्वारा की गई बुराई,और किसी को गलत समझ लेना यही सभी उस इंसान को बुरा और शैतान बना कर खड़ा कर देते है आपके सामने।यही कारण है जिससे ना जाने कितने अच्छे रिश्ते टूट जाते है,ना जाने कितने रिश्ते गलतफ़हमी,झूठ, और नफरत की भेंट चढ़ जाते है।तो क्या किसी इंसान की सच्चाई कभी नही जानी जा सकती?

सच जाना जा सकता है,लेकिन सच जानना हर किसी के लिए संभव नही,क्योंकि इसमें मेहनत लगती है,सच जानने का जुनून होना जरूरी है।

किसी ने आपसे आकर आपके दोस्त,भाई या जीवनसाथी के बारे में आकर कुछ बुराई कर दी,कि वो तो आपके बारे में ऐसा करता है,उसकी तो ऐसी आदत है,या वो धोकेबाज़ है।और आपको बहुत सच्चे दाबे बयान कर दे,लेकिन आपके अंदर जो विश्वास उस रिश्ते ,उस इंसान के प्रति है,वो आपको सच ढूढने के लिए प्रेरित करेगा।लेकिन ज्यादातर लोगों में ना तो रिश्ते को लेकर भरोसा होता है,और ना ही उस इंसान पर विश्वास,और नतीजा,एक अच्छा रिश्ता किसी के कहे में आकर,गलतफ़हमी में आकर तोड़ दिया जाता है।

क्योंकि हमारी आदत हो गयी है किसी भी सुनी हुई बात को सच मान लेना,ना तो अपनी बुद्धि इस्तेमाल की जाती है,और ना सच जानने का मन होता है।

News में,whatsapp पर,किसी के बारे में भी कुछ भी आया और हमने मान लिया,फिर चाहे वो fake news ही क्यों ना हो।सच जानने के लिए कौन मेहनत करे,कोई photo भी आये तो ये तक नही सोचना की photoshop भी हो सकता है।नही अपने दिमाग का इस्तेमाल करेंगे तो वो कम हो जाएगा।शायद इसीलिए ज्यादातर लोग दिमाग का इस्तेमाल नही करते।

Breakup भी एक text msg से हो जाता है,बहुत पुरानी दोस्ती 2 second में टूट जाती है,और 7 जन्म का शादी का बंधन 7 सेकंड में टूट जाता है।और ऐसा होता क्यों है,क्योंकि लोग सच नही जानना चाहते,हालात नही समझना चाहते,हमारी ego हमारे रिश्तों से बढ़कर जक है।अगर कोई आपके करीबी के बारे में गलत कहे,आपके रिश्ते तोड़ने की कोशिश करे,या आप खुद उसे ऐसे हालात में देखे कि रिश्ता तोड़ेने का मन करे।तो जरा समझदार बनिये थोड़ा सोचिये,और दिमाग का इस्तेमाल कीजिये,और यकीन मानिए दिमाग घिस कर कम नही होगा।सच जानने की कोशिश कीजिये,रिश्ते को बचाने की कोशिश कीजिये ego को side में रख दीजिए।

क्योंकि ना तो रिश्ते आसानी से बनते है,और ना ही हर किसी से बनते है।

मैं आपको इस उम्मीद के सर्च छोड़ कर जा रहा हूँ कि आप टूटे रिश्तों को जोड़ेंगे और आगे रिश्ते नही टूटने देंगे।

तब तक के लिए नमस्कार,अलविदा,खुश रहिये,खुशु बाँटिये।

मिलते है अगले blog में,अच्छा लगे तो शेयर कीजिये।

अपने जानने वालों को भी कुछ अच्छा पड़ने का मौका दीजिये।

Submitted by Yogendra Singh

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